पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट!

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पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट!

By |2018-01-20T17:06:36+00:00July 24th, 2015|Categories: हास्य कविता|0 Comments

एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हो गयी

और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा से लेट हो गयी;

जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई -आदतानुसार हम पर चिल्लाई;

तुम क्या समझते हो मुझे नहीं है किसी बात का इल्म;

जरुर देख रहे होगे तुम सक्रेटरी के साथ कोई फिल्म;

मैंने कहा – अरी पगली, घर आते हे ऐसे झिडकियां मत दिया कर;

कभी तो छोड़ दे, मुझ बेचारे पर इस तरह शक मत किया कर;

पत्नी फिर तेज होकर बोली – मुझे बेवकूफ बना रहे हो;

6 बजे दफ्तर बंद होता है और तुम 10 बजे आ रहे हो;

मैंने कहा अब छोड़ यह धुन –

मेरी बात ज़रा ध्यान से सुन;

एक आदमी का एक हज़ार का नोट खो गया था;

और वह उसे ढूंढने के जिद्द पर अड़ा था;

पत्नी बोली, तो तुम उसकी मदद कर रहे थे;

मैंने कहा , नहीं रे पगली मै ही तो उस पर खड़ा था;

सुनते ही पत्नी हो गयी लोट-पोट;

और बोली कहाँ है वह हज़ार का नोट;

मैंने कहा बाकी तो खर्च हो गया यह लो सौ रुपये का नोट ;

वह बोली क्या सब खा गए बाकी के 900 कहाँ गए;

मैंने कहा : असल में जब उस नोट के ऊपर मै खडा था;

तो एक लडकी की निगाह में उसी वक़्त मेरा पैर पडा था;

कही वह कुछ बक ना दे इसलिए वह लडकी मनानी पडी;

उसे उसी के पसंद के पिक्चर हाल में फिल्म दिखानी पडी;

फिर उसे एक बढ़िया से रेस्टोरेन्ट में खाना खिलाना पड़ा;

और फिर उसे अपनी बाइक से घर भी छोड़कर आना पड़ा;

तब कहीं जाकर तुम्हारे लिए सौ रुपये बचा पाया हूँ;

यूँ समझो जानू तुम्हारे लिए पानी पुरी का इंतजाम कर लाया हूँ;

अब तो बीवी रजामंद थी – क्यूंकि पानी पुरी उसे बेहद पसंद थी;

तुरंत मुस्कुराकर बोली : मै भी कितनी पागल हूँ इतनी देर से ऐसे ही बक बक किये जा रही थी;

सच में आप मेरा कितना ख़याल रखते है और मै हूँ कि आप पर शक किये जा रही थी!

कवि – अज्ञात

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