अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा

कुछ समय पहले की बात है जब बच्चे छोटे थे । उस समय हमारे सास – ससुर ने उत्तराखंड के चारों धाम को देकने की इच्छा व्यक्त की । और हमने उनकी इस इच्छा को पूर्ण करने का सोच लिया । वो गांव में रहते थे और हम उत्तराखंड के एक शहर में । हमने उन्हें अपने पास बुला लिया और सोचने लगें कि बच्चों को किसके छोड़ कर जाये । क्योंकि उनके स्कूल चल रहा थे और पेपर भी थे। इस काम के लिए मेरी भतीजी ने बहुत सहयोग किया । वो हमारे पास आ गई ।हम बहुत खुश हो कर अपनी यात्रा पर निकल गए । 1″ यात्रा ..यमनोत्री की ” जहाँ पर हमें थोडी बहुत कठिनाइयों का सामना करना पडा । पर हम सब पैदल निकल पड़े कठिन था पर अद्भुत था वहां गर्म और ठन्डे पानी के कुंड थे । जिसमे हम सभी ने स्नान किया ।और दर्शन करके नीचे आकर आराम किया । दूसरे दिन हम गंगोत्री धाम के लिये निकल गए । वहां पहुंचने में रात हो गई । सासू मां की इच्छा थी कि हम लोग अभी स्नान करें तो हम निकल पड़े और जैसे ही गंगा जी में पहली डुबकी लगाई तो ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की नीचे …मानों शरीर जम गया था ।बडी मुश्किल से तीन डुबकी मारकर बाहर आकर कपडें बदले । तब कुछ जान आई । सुबह हमने कहा हम तो होटल में ही स्नान करके जायेंगे । पर फिर हमरी सासूमां ..हमें उनकी बात माननी पड़ी । और प्रभु का नाम लेकर डुबकी लगाई ( राधे राधे ) बोलते हुए हम निकल आये गंगामइया से । 3 ” यात्रा केदारनाथ जी की थी और हम सब सुबह निकल दिए । यह यात्रा सबसे कठिनाइयों भरी थी ।दुर्लभ रास्ता और सीधी चढाई ..हरे हरे ..।केदारनाथ में हमने अपना पडाव डाला । रात को चैन से सोने के बाद सुबह चढाई शुरू की । हम सभी चलते रहे पर रास्ता तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था । ऊपर से सीधी चढाई .कहीं भी बैठने की जगह नहीं थी हम थकने लगे पर सास ससुर चढते चले जा रहे थे । पापा ( ससुर जी ) ने घोड़े पर बेठने के लिए कहा पर हम नहीं बैठना चाहते थे । हम पैदल ही चल रहे थे । एक समय यह आया कि एक कदम भी मुश्किल हो रहा था । पापा मम्मी बहुत हिम्मत दे रहे थे ।पर हम हिम्मत हार रहें थे पर तभी एक चमत्कार हुआ एक महिला ने पीछे से आगे करते हुए कहा ..जय भोलेबाबा बोलती जाओ जल्दी पहुंच जाओगी । सच में कमाल हो गया हम तो चढ़ गए और दर्शन करने पहुंच चुके थे । बहुत अच्छे दर्शन दिये बाबा ने । अच्छे से पूजा करी बाबा को छूआ भी हमने । जय भोलेनाथ की “”
” आत्माएं कई शुद्ध है , पहचान लिजिए उन्हें
पता नहीं कब कौन , कर जाये उद्वार तुम्हें ”
हम एक कदम नहीं बडा पा रहें थे और वो सामान लेकर चढ गये धन्य हो प्रभु । और तेजी से उस महिला का गायब हो जाना
वहां से हम वापसी करने लगे कुछ खाकर हम चल पड़े । कुछ दूर चलने के बाद ओले गिरने लगे जो चलने में दिक्कत दे रहे थे । हमारे पापा मम्मी के शरीर में चुभ रहे थे ।वो कांप रहे थे एक जगह रूककर हमारे पति ने कपूर जलाकर उन्हें हाथ सेकने के लिए कहा पर उनकी जगह बाकी सब हाथ सेकने लगे । हम वापस फिर चलने लगे ।ओले फिसलन भी कर रहे थे । रात होने वाली थी जल्दी उतरना भी था । ठन्ड अपना कहर बरपाया लगा । यह सब झेलते हुए हम नीचे आ गए पर कही रुकने की जगह नहीं मिली क्योंकि ओलो की वजह से । खैर हमें टीन शेड में जगह मिली कपडे सारे गीले हो चुके थे जो लेकर गए थे वह भी गीले थे ।दूसरे दिन चटक धूप ने बहुत सकून दिया और हम बद्रीनाथ धाम के लिए निकल पडे । यह पडाव सुखद अनुभव था कुछ अलग सी कशिश कुछ अलग सा अनुभव । रास्ते में कई जगह पत्थर गिरने से रुकना पडा सुन्दर मनोहर दृश्य ..हरि के होने का एहसास ..मन उतरकर नाचने का हो रहा था हमारे कन्हैया का संग संग चलने का एहसास होने लगा ” जय मेरे बांकेबिहारी ” तू है तो जग है मेरे दाता । कुछ अलग सी अनुभूति और रोमांच लिए हमने बद्रीनारायण के दर्शन किए ।वो समय हरि के होने का पूरा अहसास हो रहा था …हरि हरे..
फिर हमारी वापसी अपने घर के लिए होने लगी । मैंने रास्ते में पापा से पूछा आप तो बहुत बडे सन्त ..जब हम कुछ नहीं तो हमने महसूस किया फिर आपने तो बहुत कुछ महसूस किया होगा पर पापा मुस्कराके पर बोले कुछ नहीं ..उनके पास से राम राम की ध्वनि तरंगों में महसूस हो रही थी
” मेरे साथ एक सन्त था , फिर आंखें क्या ढूंढ रही हैं जग में ”
मेरे पापा अब नहीं रहे वो हरि मिलन में समा गए .
उस जग में ढूंढ़ रही हूं , जिस जग में तू छोड़ गया
खालीपन क्यूँ देकर मुझको , जग से नाता तोड़ गया
पापा पापा ….।
आपकी बेटी समान बहु

नीलू शर्मा

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