प्यार भरी मनुहार भरी,
एक शाम मुझे पा लेने दो।
गीत लिखे तेरे आँचल पर,
उसको तो गा लेने दो।
भूलूं ना ये गीत प्रीत का,
फिर इसको दोहराने दो।
पल दो पल का साथ तुम्हारा,
मधुरस तो छलकाने दो।
कलुषित नयन नीर जो उर में,
आँखों से ढ़ल जाने दो।
नवल स्वप्न को नव जीवन के,
सपनों में पल जाने दो।
हृदय चाहता नेह निमंत्रण,
उधर हृदय ले जाने दो।
गीत रागिनी से आज प्रिये,
मेरे मन को बहलाने दो।
स्मृतियों के कोलाहल में,
आज मुझे खो जाने दो।
इस स्वपनिल सुरमई शाम को,
अब मेरी हो जाने दो।

— अलका विजय 

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