कोचिंग क्लास

श्रीवास्तव जी की काफी इच्छा थी कि उसका पुत्र पंकज इंजीनियर बने ।पंकज एक औसत

दर्जे का छात्र था पर पिता जी के प्रयास से डोनेषन कोटे द्वारा इंजीनियरिंग में एडमिषन

हो गया ।

अब समस्या उठी — अच्छी पढ़ाई के लिए कोचिंग क्लास में एडमिषन की।श्रीवास्तव

जी को ये भ्रम था कि रेगुलर क्लास से ज्यादा अच्छी पढ़ाई कोचिंग क्लास में होती है और परीक्षा के समय कुछ जोड़ – तोड़ की संभावना भी बनी रहती है ।अतः

भविश्य निधि एकाउंट से लोन लेकर कोचिंग क्लास में भी दाखिला करा दिया ।

क्लास चलते रहे पर पर पंकज के काफी मेहनत के बावजूद अच्छे नंबर नहीं आये ।पंकज

को खुद आष्चर्य हुआ कि इतने कम अंक कैसे मिले? फाइनल परीक्षा भी नजदीक आ

गई ।

तब कोचिंग क्लास के संचालक ने पंकज के पिता जी को बुलाया और सहानुभूति जताते

हुए बोला — “ फाइनल परीक्षा नजदीक है – – – हमने स्पेषल क्लास का इंतजाम

किया है जिसमें अनुभवी प्रोफेसर आयेंगे ,बढ़िया पढायेंगे और परीक्षा में पास होने की

गारंटी भी रहेगी ।“

जब श्रीवास्तव जी ने स्पेषल क्लास का फीस पूछा तो जवाब सुनकर उनके होष ही उड़

गये ।तब विस्फारित नेत्रों से संचालक को देखते ही रह गये ।

फिर संचालक महोदय ने विहंसते हुए कहा — “डिग्री लेने के लिए लाख रूपये तो

कम ही है – – सब जगह सेटिंग करनी पड़ती है – – प्रष्न पत्र भी मिल जाते हैं और

डिग्री आराम से मिल जाती है ।“

श्रीवास्तव जी तब सोचते ही रह गये — यह षिक्षा का षिश्टाचार है या

व्यापार? ■

– – सेवा सदन प्रसाद

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