उसका प्रश्न

दीवार पर भगवान श्रीकृष्ण का मन भावन कलेन्डर देखकर उसने सिर
पर आंचल डाला और तत्परता से दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना के स्वर में आंखें मूंदकर
बुदबुदाने लगी, ‘‘ हे भगवान मेरी लाज रखना ……. इतने में उसके कन्धे पर हाथ रखकर
वह मुस्कराया ‘तुम लाज की बात कर रही हो? ….. जानती हो तुम क्या हो……….
.. मैंने तुम्हें आज सब कुछ पाने के लिये ही तो बुलाया है, खरीदी है तुम्हारी आज की
रात ……….।
उसने डबडबायी आंखों से घूमकर उसकी ओर देखा।‘‘ मैं मजबूरी में अपना
जिस्म बेचती हूं, आत्मा नहीं, मेरी आत्मा पवित्र हैं।
– और मैं भी तुम्हें चाहता हूं दिल से…. मुहब्बत करता हूं तुमसे
– नहीं-नहीं मनुष्य इच्छाओं से मुहब्बत करता है। उसकी चाहत उसकी कामना
में छिपी है।
– मगर मैं तुम्हें हर रोज एक नये पति से मुक्ति दिलाना चाहता हूं, इस कलंक
को मिटा देना चाहता हूं, षादी करना चाहता हूं तुमसे ।’’
– यें कलंक और मुक्त की बाते अब मुझे जख्मी नहीं कर पाती। शादी और
मुहब्बत की बातें ……… ये बाते क्वारी लड़कियों को फुसलाने के लिये कहीं जाती है,
मुझ जैसी वैश्या से दिल बहलाने के लिये नहीं।’’
-‘‘ देखों, तुम समझ नहीं रही हो मुझे। मैं तुम्हें दिल से चाहता हूं। और तुम्हारा
दिल भी जीतना चाहता हूं।
– ‘‘ तुम मेरा दिल जीतकर क्या करोगे आज के अर्जुन अपने भाईयों में फिर
से बांट दोगे ना?

शराफत अली खान

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu