अनमोल सोफा

नीले आसमान के नीचे फैली पेड़ों की घनी छाया, पार्किंग की इतनी पर्याप्त जगह मानो कोई उडन तश्तरी उतरने का स्थान बना हो, सेक्टर 16 पंचकूला में आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से लगा एक पता बोर्ड जिस पर समकालीन हिन्दी साहित्य के प्रमुख प्रकाशक के नाम से लिखी पंक्ति दूर से ही आकर्षित करती है । सैकेण्ड फलोर पर लगा ये पता बोर्ड दूर से ही चमकता दिखाई पड़ जाएगा, साथ ही बिल्डिंगस पर बड़े बड़े फलैश बोर्डस की भरमार लेकिन आधार प्रकाशन का बोर्ड एक अलग ही आभा लिए चमक रहा है ध्रुव तारे की तरह।
छोटे से प्रवेश द्वार से सीढ़ीयां चढ़ते हुए मानो साहित्य के स्वर्ग की तरफ जा रहे हों, गैलरी में लटका एक सुझाव बोक्स और एक छोटे से दरवाजे को क्रास करते ही अन्दर किताबों का संसार हमारी जिज्ञासा को और विशाल विस्तृत करता दिखाई पड़ता है।
अन्दर ही छोटा सा आफिस जिस पर आधार प्रकाशन के सर्वेसर्वा श्री देश निर्मोही जी एक अलग ही मुद्रा में बैठे आपका स्वागत करते मिल जाएंगे। उनके ठीक सामने रखा एक अनमोल सोफा जिस पर बैठने का शोभाग्य आपको भी मिलेगा यदि आप वहां पर कभी पहुंचेंगे।
इस भूरे रंग के सोफे पर पता नही कितने लेखक, कवि, रचनाकार, साहित्यकार, फिल्मकार, पटकथा लेखक बैठकर अपनी यादों के साये छोड़कर चले गए। इतनी महान विभूतियों का साक्षी ये सोफा अपने आप में एक अनमोल धरोहर है। कई बार मन करता है कि इसे किसी संग्रहालय में होना चाहिए और साथ ही इस पर बैठने वाले महान साहित्य कारों के नाम एक लिस्ट पर दर्ज हों, इस तरह की साहित्यिक धराहरों को सहेजने का वक्त आ गया है। इस अनमोल सोफे के लिए इतना तो होना ही चाहिए। जो साहित्यकारों की यादों एवं उनकी छूहन की एक अमिट धरोहर है।

लव कुमार

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