सावधान मौत आ रही है

जन्म
अभी लिया ही था
एक
अनेक जीव ने
अक्षम इलाज
के चलते मृत्यु में बदल गया ।
प्रदूशण के कारण
उन्हें नहीं बचाया जा सका
अभी
रेल हादसा में ,नोट बदलने की होड़ में
सदमे में
तो कुछ लालच में ही चले गये है
धर्मों के
ठेकेदार
मुखौटा लगा कर तार रहे
यम बनकर
षनि की ढैया बता कर सबको
षोशण से षोशित षक्ति भी बच न सकी है
करो याद सुने खण्डहर वे
जन्मभूमि मृत्युभूमि बनी स्वार्थ के आहूत से
चाहत की चाह से गरीब की आह से
वे टुकड़े टुकड़े हो गये
अचंभित है सभी अपनी धड़कनों के वास्ते
लो वे भी चले गये
जो कहते थे कभी
हे पार्थ तुम युद्ध करों
हरवाहे चरवाहे रखवाले की चिन्ता भी
चिता में बदलती है
सावधान मौत आ रही है ।

अनिल सोनी

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