ऐ लड़की तू सुन जरा

सुनाती तुझे मैं एक कविता
तू है एक लड़की जिसका
नहीं है कोई वजूद यहां,
डरकर हमेषा रोती रही
तो घुटती रहेगी
हर पल यहां
बढने न दे अंधेरे की खाई को,
जला दे उजाले का तू दीप यहां
पोंछकर इन आँसूओ को
हौसला बढ़ाये जा,
मत भूल अपनी ताकत को
स्त्रोत है तू षक्ति का
अगर देखें कोई बुरी नजर से,
तो रूप धर ले काली का
पर रूकना नहीं,डरना भी नहीं
बस कदम कदम बढ़ाए जा
मौजूद हैं एक परिन्दा तुझमे
जो रूकना नहीं
बस जानता है चलना
थामकर दामन उसी का
तू जोष को बढाये जा।

हेमलता रावल

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