आशीर्वाद

किसी सिद्धपीठ के एक अर्धविक्षिप्त मनीषी ने

एक कुत्ते की स्वामीभक्ति से प्रसन्न होकर

दे दिया आशीर्वाद—-

‘गर्भवान भव’

मूर्धन्य मनीषी के आशीष से

कुत्ता गर्भवान हो गया

परंतु वह अत्यंत दुःखी हुआ

इस बात को  जानकर

कि उसके गर्भ में मानव भ्रूण पल रहा है

जो उसे बार-बार

अपने अस्तित्व का बोध कराने के लिए

अल्ट्रासाउंड के दुकान की ओर जाने को

प्रेरित कर रहा है

उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो रही है

लिंग की जाँच और गर्भपात का विचार

मन को मरोड़ रहा है

यह तो प्रारंभिक अवस्था है शिशु की

अभी से ही कुत्ते के मन में राजनीति,कूटनीति

ब्लैक मनी,लूट खसोट,हफ्ता वसूली आदि के भाव

पनप रहे हैं

ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया के सभी लोग

कुत्ते के बल पर ही पल रहे हैं

समय बीतता रहा

चिकित्सक ने कहा–

“एक हफ्ते में आप पुत्रवान हो जाएँगे

आवश्यक है बस एक बार और अल्ट्रासाउंड”

अंदर विकसित हो रहे मानव भ्रूण का प्रभाव

कुत्ते के मन-मस्तिष्क पर पूरी तरह

हावी होने लगा

परंतु अल्ट्रासाउंड का जो प्रतिवेदन आया

उसे देखकर चिकित्सक ने जो बताया

वह यह था कि

कुत्ते के गर्भ में

घोटाला,चोरी,डकैती,हत्या,बलात्कार का भ्रूण

विकसित हो गया है

अब गर्भपात भी संभव नहीं है

जबरदस्ती करने पर

ईमानदारी का अस्तित्व भी

समाप्त हो जाएगा

भ्रष्टाचार पुष्पित हो जाएगा

काला-मन पल्लवित हो जाएगा

उसके तांडव को कोई ना रोक पाएगा

प्रत्येक अनुनय-विनय पर

वह खिलखिलायेगा

अट्टहास करते पृथवी पर आएगा

और

मानव को ही अपना संरक्षक बतलायेगा।

— अनिल कुमार मिश्र

 

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