मैं प्रतीक्षा तुम्हारी करूँ आज तक

रात्रि से प्रात तक प्रात से साँझ तक

बाबरे  ये  नयन  तांकते  हर  दिशा

नित्य की भाँति क्या आओगी इस निशा

मन में अकुलाहटें प्राण व्याकुल व्यथित

लम्हा हर एक मुझको लगे साल सा

टकटकी बाँधकर देखतीं हैं डगर

पुतलियाँ प्रतीक्षा करें आज तक

रात्रि से प्रात तक प्रात से साँझ तक

मैं प्रतीक्षा तुम्हारी करूँ आज तक

मैं तुम्हे देखकर कुछ भी कह ना सका

धड़कने प्रीत के गीत गाने लगीं

कोई सपना हक़ीक़त हुआ ना कभी

आँख फिर से नयों को सजाने लगीं

आओगी स्वप्न में तुम इसी  वास्ते

नयन नींद की प्रतीक्षा करें आज तक

रात्रि से प्रात तक प्रात से साँझ तक

मैं प्रतीक्षा तुम्हारी करूँ आज तक

प्रेम में सत्यता मेरे होगी अगर

देखना एक दिन आओगी दौड़कर

प्रेम राधा के जैसा भी स्वीकार है

कृष्ण जैसा बना बस यही सोंचकर

बाँसुरी हाँथ लेकर किसी डाल  पर

सुर प्रतीक्षा तुम्हारी करें आज तक

रात्रि से प्रात तक प्रात से साँझ तक

मैं प्रतीक्षा तुम्हारी करूँ आज तक

— विशाल समर्पित

 

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