गधा चला व्यापार करने

गधा बेचारा सामान को ढोकर

थककर बहुत , एक दिन बोला

इस हम्माली से मुक्त होना है

अब तो बस व्यापार करना है

कही अपने दोस्त से मन की बात

दोस्त बोला न यूँ हो उदास

है एक पहचान का बन्दा

जो है माहिर करता है धंधा

चलेंगे कल हम करने बात उससे

सीखेंगे व्यापार के ढंग उससे

पहुंचे दोनों उनके पास

देखी उनमें जब सीखने की प्यास

बोला व्यापारी एक सौदा करते हैं

सीखने है गर व्यापार तो बात करते है

रखी शर्त उसने जो वो समझो

करनी होगी नौकरी पहले तुमको

दिन से रात मेहनत करनी होगी

तभी मिलेगी तनख्वा तुमको

धीरे धीरे खुद सीख जाओगे

व्यापारी खुद ब खुद बन जाओगे

सुनकर गधा को सुध आई

हम्माली भली जो है मेरी अपनी

नौकरी तो फिर भी रहेगी परायी

लौट कर बुद्धू घर में आया

व्यापारी बनने का सौदा छोड़ आया ।

आज भी गधा हम्माली है करता

अब जग जाने यह नौकरी करता

या व्यापार है करता !

— कल्पना भट्ट

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This Post Has One Comment

  1. धन्यवाद आदरणीय

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