हे भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु

हे भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु

ऐ मेरे देश’ के प्यारे किशोरों
जब से होते हैं तेरे मस्ती के दिन शुरू
उस उम्र में शहीद हो गए थे
अपने भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु

जो फरवरी और मार्च
रंगों की होली का महीना कहलाता है
उस हर तेईस मार्च को
उन शहीदों का हर अपना आँसू बहाता है

आँसू के उस दरिया में
ऐ ‘निर्दोष’ आज तुम भी चलो बह जाओ
रहेगा अखंड अपना भारत
कुछ ऐसा तुम भी कर जाओ-कह जाओ

देश की सीमा के अंदर
देश के दुश्मन को अब नहीं आने देंगे
अपने शहीदों की षहादत
अब बेकार में नहीं हम अजी जाने देंगे

देष के वीर शहीदों की
आज कसम, अभी हम भी खाते हैं
अपनी मस्ती को कर किनारे
हम भी देश की सीमा पर जाते हैं

हे भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु,
आपका नाम ता-कयामत अमर रहे
आपकी शहादत आज है काम आई
अपने देश के वर्तमान हैं सँवर रहे

— – डॉ. गोपाल निर्दोष

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