हमारा द्स्तूर     

आज का प्रेम दिवस सिर्फ बिस्तर तक ही सीमित है .
चौराहे पर कहा कहा करता बच्चा उसका उदाहरण है .

पुरुष हाथ खङे करता है – मै क्या  जानुं  ?
मै तो पुरुष  हुं , खरा सोना हुं
ना कोई जूठा हुआ हुं ना मेरे ऊपर कोई दाग लगा है .

गलती तुम्हारी है
क्यो आई  थी मेरे पास??

अरे यार , छोङो जो हुआ सो हुआ
अगली बार ‘छतरी’ का इस्तेमाल  करूंगा ,
ना कोई डर ना कोई बदनामी
प्यार होगा भरपूर
यही है हमारा आज का दस्तूर .

— नीतू सुदीप्ति ‘नित्या ‘

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