वो पाषाण हृदय क्या जाने?

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वो पाषाण हृदय क्या जाने?

By |2017-02-27T17:16:30+00:00February 27th, 2017|Categories: कविता|3 Comments

वो पाषाण हृदय क्या जाने?
हृदय है तो, पीड़ा भी होगी!

व्यथा होती है सागर सी गहरी,
पीड़ा होती है कितनी असह्य,
टूटते हैं तार कितने ही जीवन के,
आशाओं की, उम्मीदों की, भावनाओं की,
वो पाषाण हृदय क्या जाने?
हृदय है तो, पीड़ा भी होगी!

तोड़ते है जो हृदय किसी का,
आशाओं के फूल वो मसल देते हैं,
तोड़ जाते है तार मन के प्रांगण के,
देख मगर कहाँ पाता है कोई आँसू,
विह्वलता का, नीरवता का, अधीरता का,
वो पाषाण हृदय क्या जाने?
हृदय है तो, पीड़ा भी होगी!

गर रखते हो भावुक हृदय,
मत तोड़ना किसी हृदय की आशा,
समझो आँखों की विवश भाषा,
आशाओं में बसता इक जीवन,
भावुकता का, विवशता का, आकंक्षाओं का,
वो पाषाण हृदय क्या जाने?
हृदय है तो पीड़ा भी होगी!

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3 Comments

  1. सुशील March 3, 2017 at 8:38 am

    सुन्दर रचना ।

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  2. तरूण कुमार March 3, 2017 at 10:30 pm

    सुन्दर शब्द रचना

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  3. Sunil Kumar September 27, 2018 at 9:57 pm

    बहुत अच्छा

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