भोली जनता  

इलेक्शन जब भी आते हैं ,तो भाषण ये सुनाते हैं ,

कभी  कुत्ते , कभी बिल्ली ,कभी गदहे को लाते हैं .

 

कि अपनी आपसी बातों में अपने ये बड़े नेता

बेचारे भोले पशुओं को निशाना क्यों बनाते हैं ?

 

कभी राहुल ,कभी मोदी , कभी अखिलेश आते हैं ,

जी अपने केजरी इन सब को धोखेबाज़ बताते हैं .

 

कसम दिल्ली की खाते हैं मगर पंजाब जाते हैं ,

न  यूँ हैरान हों साहिब ग़ज़ब अपने ही ढाते हैं .

 

कभी सायकिल , कभी घी और कंप्यूटर बंटवाते हैं ,

अंगूठा तब दिखाते हैं कि जब ये जीत जाते हैं .

 

बड़े बंगले बड़ी गाडी तिजोरी ये छुपाते हैं ,

राहुल बाबा बड़े सयाने फटा कुरता दिखाते हैं

 

कभी गुड़ पेड़ पर और आलू फैक्ट्री में लगवाते हैं ,

और अपनी फालतू बातों से सबको ये पकाते हैं .

 

कि इनके भाषणों में जी गड़े मुर्दे उखड़ते हैं ,

ब्लड प्रेशर हैं बढ़ जाता पसीने छूट जाते हैं .

 

किसी को गोद लेते हैं किसी कि गोदी चढ़ जाते ,

चुनावों में न जाने कितने रिश्ते ये बनाते हैं !

 

बहन जी को नहीं भूलो वो अपना राग गाती  हैं ,

मैं बेटी हूँ दलित कि ये पुराना गीत गाती हैं .

 

बेचारी भोली जनता इन सबकी  बातों में आ जाती हैं ,

खाये धोखा मगर  फिर भी  वोट देने को जाती हैं .

 

इनको तो कहानी ये बारम्बार सुनानी है,

चलो अब बंद करते हैं हमें क्या गाली खानी हैं .

मंजू सिंह

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This Post Has One Comment

  1. janta ke saath hamesha dhokha hi hota hai sach hai

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