बीता हुआ हर मंज़र बड़ा दिलचस्प दिखता है

बीता हुआ हर मंज़र बड़ा दिलचस्प दिखता है
यादों में अपना शहर बड़ा दिलचस्प दिखता है
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लौटते हुए …..महीनों बाद के….. सफ़र से
मील का हर पत्थर बड़ा दिलचस्प दिखता है
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मेरी पलकों पर एक आँसू ,एक तारा अर्श पर
यह नज़ारा रात भर बड़ा दिलचस्प दिखता है.
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पत्ते , फूल , फल ………बस यूँ ही लटकते है
परिंदे हो तभी शजर* बड़ा दिलचस्प दिखता है
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निगाहें शर्मसार है या जमे डल झील का पानी
जाड़ों में श्रीनगर बड़ा दिलचस्प दिखता है.

— गौतम कुमार सागर

 

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