हर नदी के पास वाला घर तुम्हारा

हर नदी के पास वाला घर तुम्हारा
आसमां में जो भी तारा हर तुम्हारा

बाढ़ आई तो हमारे घर बहे बस
बन गई बिजली तो जगमग घर तुम्हारा

तुम अभी भी आँकड़ों को गढ़ रहे हो
देश भूखा सो गया है पर तुम्हारा

फिर तुम्हें कोई मदारी क्यों कहेगा
छोड़कर जाएगा जब बंदर तुम्हारा

ये ज़मीं इक दिन उसी के नाम पर थी
वो जिसे कहते हो तुम नौकर तुम्हारा

दूर उस फुटपाथ पर जो सो रहा है
उसके कदमों में झुकेगा सर तुम्हारा

— डॉ. राकेश जोशी

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