किसानों की दशा

फसलें तैयार खड़ी खेतन पे

किसान चिन्ता करे नोटन पे

न वोटन पे ।

बगैर खाद की बौनी कर कें

पानी खेतन पे दओ उधार

अब जो आ गयो हारबेस्टर ।

सूखी फसलें पोचो चना

अब तुमई बताओ धना

कैसे होत चैत को काम बिना रुपैयों सें

नशा चढ़ो है रंग केशरिया कौ

कमल सूख गए तालाबों के

पानी नहीं नहरों में भैया ।

जो जियो चलो है

नेट को , हंसिया नहीं चलाता कोई

ठँड़े बैठे परे परे और

औंधे परे जियो चला रहे ।

का भविष्य है नव जवानों का

क्या भविष्य है छोटे बच्चों का

राजतंत्र में किसान तंत्र का मंत्र

डगमगाया है!

अरे देखो विकास का परचम लहराया है

सब साथ सबका विकास

यही कहलाता है।

 

— अनिल कुमार सोनी 

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This Post Has One Comment

  1. सच में यही किसान की हालात है कोई भी इसको निराकरण नहीं कर रहा।

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