सवैया

समस्या पूर्ति– मनाई
( 1 )
कुंज गली महकी सगरी जब स्याम सनेह उडाई ।
झूम उठी सुन के सखियाँ मन मोहन की मुरली मन भाई ।
नैनन सौ जब नैन मिले सग के मन की कलियाँ हरसाई ।
प्रेम सुधा बरसा ब्रज में हरि पावन फागुन फाग मनाई ।
( 2 )
द्वेष भरौ सग के मन में सग के मन माँहि भरी कुटिलाई ।
स्वारथ में सदभाव तजौ सग भूल गये अब लोक भलाई ।
काम रती मन भाव भरौ निज देवर देख डरे परजाई ।
सौच दुखी मन भौत भयो नहि “नीरज” फागुन फाग मनाई ।

— पवन कुमार शर्मा “नीरज”

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One Comment

  1. शानदार…

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