साथ किसी के रहकर भी
क्या मेरे बारे में सोचोगी

यदि आ जाऊँ किसी दिवस
मैं निकट तुम्हारी आँखों के
और तुम्हारा भी मन हो
मुझे देखते रहने का
क्या तुम तब भी अपनी
आँखों को रोकोगी
साथ किसी के रहकर भी
क्या मेरे बारे में सोचोगी

किसी और की मेंहदी से
जो रचे हुये हैं हाथ तुम्हारे
क्या उन रचे हुये हाथों से
मेरी आँखों से बहते
तुम अपने आँशू
दोनों हाथों से पोछोगी
साथ किसी के रहकर भी
क्या मेरे बारे में सोचोगी

-विशाल समर्पित

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One Comment

  1. Neelu mishra

    Supar….

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