सेतु समुद्रम्

कश्मीर से तिवेन्द्रम्,

मुद्दा जहाँ भी देखों।

सेतु समुद्रम्-3।

राम कल्पना नहीं,दिल का आराम हैं।

राम के आदर्शो से ही,भारत  महान हैं।

विरोध प्रभु का करने वाले••••••,

तुझे आयी नही थोड़ी भी शरम।

कश्मीर ••••••सेतु समुद्रम्-3।।

कहा गया राम का,वज़ूद नही हैं।

ब्रीज तो दिखाया गया,सेतु नही हैं।

डाक टिकटों पे मिली,कहानी जो  राम की।

खन खनाते सिक्कों में,छुपे थे राम -जानकी।

राम ह्वदयों को,ठेस लगाने वाले••••।

कही निकल जाये न,तेरा ये दम्।

कश्मीर •••••सेतु समुद्र-3।।

सुग्रीव जैसी मैत्री, कहा कोई निभायेगा।

नल-नील के  साहस को,कौन दिखलायेगा।

अंगद का पैर नही, हटा लंकपती से तो।

कौन  यहाँ राम सेतु के, पत्तथरों को हिलायेगा।

श्री राम राह को,मिटाने वाले •••••।

करूणा हो कर किया,करूणा को खतम्।

कशमीर•••सेतु समुद्रम्।।

— अखिलेश जैन

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