सुन बिल्लो सुन री !

बोल रहे झींगुर ,
सुन री तू सुन सुन
तारों की टिमटिम में स्वप्न नए बुन री !
सुन बिल्लो सुन री !
सुन री तू सुन री ,
मेंढक की टर्र- टर्र ,
पपीहे की पी- पी,
सब गावें अपनी अपनी ही धुन री
 तू सुन बिल्लो सुन री !
जितनी भी बिखरीं सब
खुशियां तू चुन री
सुन बिल्लो सुन री !
तू सुन बिल्लो सुन री !

— मंजू सिंह 

 
Rating: 3.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Manju Singh

बीस वर्षों तक हिन्दी अध्यापन किया । अध्यापन के साथ शौकिया तौर पर थोडा बहुत लेखन कार्य भी करती रही । उझे सामजिक और पारिवारिक इश्यों पर कविता कहानी लेख आदि लिखना बेहद पसन्द है।

Leave a Reply

Close Menu