डॉगी मेरा यार

वो है बेजुबान,
फिर भी बोलता है,
एहसासों की भाषा,
आता है उसे,
प्यार जताना,
वो मुझे सिखाता,
बोलना प्यार की भाषा….

वो समझ लेता है,
मेरी ख़ामोशी को,
वजह  जानकर,
होंठो में मुस्कान,
लाकर की चैन पाता है….

वो समझ लेता है,
मेरी हँसी में छिपे दर्द को,
महसूस करके,
करता है ,
दर्द का ईलाज ख़ुशी से…….

वो समझ लेता है,
मेरे गुस्से छुपे प्यार को ,
जब होती हूँ,
मैं गुस्से में,
करता है मुझे,
बेसुमार लाड़ प्यार…

मैं समझती हूँ,
जितना नासमझ,
वो है उससे,
कही ज्यादा,
समझदार,
बफादार,
ऐसा है,
मेरा यार डॉगी……

— गरिमा कांसकार

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