द्रुता छन्द

शत्रु देखते, सहम के खड़े।।

घेरते सभी, अब उसे वहाँ ।

युद्ध में खड़ा, रण करे जहाँ ।।

कर्ण द्रोण भी,  समर में डटे।

देख वीर को, वह नहीं हटे।।

युद्ध बीच में, लड़ रहा अभी।

शत्रु भी उसे, छल रहे सभी।।

कृष्ण ने कहा, अब सनो सखे।

क्रोध को तजो, बढ़ चलो सखे।।

युद्धभूमि में, लड़ रहे यहाँ ।

अंगराज ने, वध किया वहाँ ।।

श्याम ने सभी, सच वहाँ कहे।

पुत्र शोक में, बिलखते रहे।।

युद्ध के लिये, अब चलो सभी।

सिन्धुराज का, वध करो अभी।।

– राकेश यादव “राज

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