बेटियाँ

ख़ूबसूरत ख़्वाब  जैसी  बेटियाँ।
मोतियों की आब जैसी बेटियाँ।
प्यार से  थामे हुए  परिवार को;
क़ीमती  महराब  जैसी बेटियाँ।

ज़िन्दगी के गीत जैसी बेटियाँ।
दिलनशीं संगीत जैसी बेटियाँ।
बेवफ़ाई से भरे संसार में;
एक  सच्चे मीत जैसी बेटियाँ।

भोर में खिलते कमल सी बेटियाँ।
मीर की  उम्दा ग़ज़ल सी बेटियाँ।
ज़िन्दगी हो जब  निराशाओं भरी;
जादुओं  वाले अमल सी बेटियाँ।

फूल वाली क्यारियों सी बेटियाँ।
महकती फुलवारियों सी बेटियाँ।
मन्दिरों  की घंटियों की गूँज सी;
उर्स  की क़व्वालियों सी बेटियाँ।

मोहिनी मुसकान वाली बेटियाँ।
माँ पिता की जान वाली बेटियाँ।
आइना हैं आपकी तक़दीर का;
बरकतों की खान वाली बेटियाँ।

— बृज राज किशोर “राहगीर”

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