कुंडलिया छंद…

सबको है सम्मान से, जीने का अधिकार |
पशुओं पर यूँ आप क्यों, करते अत्याचार |

करते अत्याचार, मार कर उनको खाते |
सींग, दाँत अरु खाल, बेच कर अर्थ कमाते |

कहे श्लेष कविराय, मानने वाला रब को |
पशु हो या इंसान, प्यार देता है सबको |

— श्लेष चन्द्राकर

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