आवारा मसिहा

” अरे यार , कितनी बार कहा है तुम्हे ,दूध डाल देती हूँ रोटी डाल देती हूँ बस ,मेरा पिछा मत किया करो ” __ चेतना ने अपने साथ – साथ चलते कुत्ते से कहा ।
” लो अब दुप्पटा खिचने लगे ।सडक के आवारा कुत्ते बस आवारा ही होते है ।कभी पालतू कुत्ते जैसे मत बनना ,पता नही क्यो परेशान करता है ।जब भी घर से निकलो पिछे पिछे हो जाता है ”  चेतना का चिढना और बडबडाना अनवरत जारी था ।
तभी चेतना के नजदीक एक गाडी आकर रूकी और एक शख्स गाडी से उतरकर उसके नजदीक आया , लेकिन दूसरे ही पल उसने चेतना को खिचकर गाडी मे डालने की कोशिश की लेकिन वह कामयाब न हो सका ,वह आवारा कुत्ता उसपर बुरी तरह झपट पडा ।उसका साथी ये सब देखकर गाडी से बाहर आया तो उसने उसकी भी बोटियाँ काट डाली ।वह दोनों दर्द से करहाते हुए तुरंत गाडी लेकर रवाना हो गए ।चेतना ने पहली बार उस आवारा कुत्ते को गले लगाया ।

— पुष्प सैनी

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