“एक कलश में एक बहुत छोटी सी छिद्र है । कलश में पानी पूरा शीर्ष तक भरा हुआ है, धीरे धीरे उससे पानी निकलता जा रहा है, पहला दिन शीर्ष से थोड़ा सा नीचे, दूसरा दिन शीर्ष से थोड़ा ज्यादा नीचे, प्रतिदिन उस कलश से बूंद बूंद कर जल निकलता जाता है और कुछ दिनों बाद पूरी की पूरी कलश खाली हो जाती है, और कलश में एक बूंद भी पानी नहीं बचता , इसी तरह हमारा जीवन है। जिसमें हम छोटी-छोटी कई गलतियाँ किया करते है, जरूरत है उन गलतियों से सबक ले, और आगे वैसी गलती को न दोहराएं, अगर छोटी गलतीयों को सुधार लेंगे तो खुशीयों रूपी जल हममे हमेशा भरा रहेगा नहीं तो कब उन गलतियों के कारण हमें बहुत बड़ी हानि पहुँच जाए जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते…..!!”
संतोष कुमार वर्मा
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