कड़वाहट  बढ़ने  लगी संबंधों के द्वार

धुआं हो गयी जिंदगी सुलग रहा प्यार ।
अभी शमांऐ जल रही  जिंदा है  प्यार
अभी मायूस मत होना जिंदा है बीमार ।।
हंसों की जमात के काग बनें है सरदार
बनाकर मूर्ख काग  छाप  रहें है  हज़ार ।।
रोना – धोना छोड़कर हो जाओं तैयार
सुनो,मिलता नहीं बिन छिने अधिकार ।।
देख मेरे  हालात आज शर्मिंदा है यार
क्योंकि जिधर देखें उधर दौलत अपार ।
अनायस बना है पानी अंगारों का मित्र
छुरा घोपा पीठ पर किया सामने प्यार ।।
मेरे चेहरे पर नही दौलत पे फिदा है यार
वे समझते रहें सदा  मुझे मुर्दा , बीमार।
कुछ तन में  रोग है ,  कुछ मन है रोग
रोज़नामाचा  मत  दिखा,मुर्दा है प्यार ।।

— गोपाल कौशल

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