बूँदों का संगीत

Home » बूँदों का संगीत

बूँदों का संगीत

By |2017-08-02T20:31:31+00:00July 18th, 2017|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

टिप टिप गिरती

बूँदों का संगीत।

होता है

कानों को सुखद प्रतीत।

झोंके चार

हवा के आकर

चले गए

तन को सहलाकर

भुला न पाए

तपता हुआ अतीत।

आयें बादल

ढोल बजाकर

बरस पड़ें

बिजली चमकाकर

तभी लगेगा

हुई ताप पर जीत।

जीवन में ज्यों

सुख दुख का क्रम

यूँ ही

आते जाते मौसम

सदा सदा से

यही रही है रीत।

-बृज राज किशोर ‘राहगीर’

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment