बदलाव

हो कुछ खबर तो

हमे भी बताना

कहाँ खो गया वो कल

हमे भी बताना

घड़ियों की सुई हर पल बदल रही है।

उम्र भी अब साथ छोड़ने को

तैयार बैठी है।

अगर कुछ बदला हो

जरा हमें भी बताना

वो सड़क पर बैठी कल भीख

माँग रही थी।

वो आज भी है

सूरत बदली पर जरूरत नहीं

नज़रिया बदला हमारी आदत नहीं

सैकड़ो को दावत देंगे।

किसी के लिए एक दाना नहीं

हो खबर कुछ तो

ज़रा हमे भी बताना

योजनाओं का आंकलन

हम क्या जाने

हकीकत हम समझते है।

पढ़ना हमे आता नहीं।

अगर कुछ बदला हो

ज़रा हमे भी बताना

कहा खो गया वो कल

हमे भी बताना।

-अविनाश कुमार

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