आईना

आईना मुझे मेरी औकात दिखाता है,

जिस धूल से उठा हूँ,

उस धूल का ही एहसास दिलाता है,

मेरे रोने पर हँसता है वो आईना,

मेरे हँसने पर रोता है वो आईना,

क्योंकि, उसे पता है,

हँसना मुझे मेरा अक्स  भुलाता है,

रोना मुझे याद दिलाता है दुनिया का सच,

मुझे बहुत प्यारा है घर का वो आईना,

जिसने सिखाया मुझे जीने का मायना,

आईना मुझे मेरी औकात दिखाता है,

मुखोटे के पीछे छिपा इंसान दिखाता है,

वो आईना जो मुझसे, कभी झूठ नहीं बोलता,

जो मेरे गमों को,

लोगों कि हँसी से नहीं तोलता,

आईना जो हमसफ़र की तरह,

मेरे दुखों को है फरोलता,

सब को मिल जाये गर,

दुनिया में आईना सा दोस्त,

फिर कोई भी न हो,

पल भर के सुखों में मदहोश,

आईना मुझे मेरी औकात दिखाता है,

जिस धूल से उठा हूँ,

उस धूल का ही एहसास दिलाता है.                             

-निशांत खुरपाल

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