पशु प्रेम के दोहे

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पशु प्रेम के दोहे

By |2017-05-17T08:03:28+00:00May 16th, 2017|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|Tags: |0 Comments

मानव हो निष्ठुर सतत्,खाता है वह मांस !
जिव्हा की ख़ातिर ” शरद”,लेता पशु की सांस !!

हर प्राणी में आत्मा,हर प्राणी में जान !
रक्षा हो हर जीव की,तब ही मानव- मान !!

कितनी फलदायी सदा,कहलाती जो गाय !
देवों की वो देव है,दूध-दही और आय !!

वफ़ा,त्याग का रूप है,कहते जिसको स्वान !
मालिक़-रक्षा में करे,अर्पित अपनी जान !!
क्यों मारें हम जीव को,लिये धर्म की ओट !
ईश्वर तो कृपा करे,इंसां करता चोट !!

हर प्राणी की ज़िन्दगी,है रब की ही है देन !
हर कोई जीता रहे,तभी अमन, है चैन !!

पशुपालन वरदान है,वनप्राणी उपहार !
पशु को जो नर पालता,फैलाता उजियार !!

पशुहिंसा है क्रूरता,त्यागे नर तत्काल !
शाकाहारी जो बना,वह नित मालामाल !!

 –प्रो.शरद नारायण खरे

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