मैया और मौसी

गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी
इन दोनों को बदनाम करे, पड़ोसन मुँहझौंसी

मैया जैसी गैया भैया, हमको तो दूध पिलाती है
निज जिह्वा से चाट-चाट, हमको वो दुलराती है
मैया जैसी गैया को भी, ला देंगे हम कनौसी
गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी…

बिल्ली मौसी में अदब बहुत है, कहती है-मैं आऊँ
उसके संग खेलन को मम्मी, क्यों नहीं मैं जाऊँ
उसको छोड़ बता दे मुझको, प्यारी है कौन-सी
गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी…

बाबा हमरे बात किये थे, फोन किये जब दिल्ली से
कहते रहते हैं वे सदा, सीखो तुम गैया-बिल्ली से
बिल्ली से सीखो सतर्कता, परहितार्थ करो गौ-सी
गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी…

– डॉ. गोपाल निर्दोष

 

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