मैया और मौसी

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मैया और मौसी

By |2017-05-16T16:53:48+00:00May 16th, 2017|Categories: आलोचना|Tags: |0 Comments

गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी
इन दोनों को बदनाम करे, पड़ोसन मुँहझौंसी

मैया जैसी गैया भैया, हमको तो दूध पिलाती है
निज जिह्वा से चाट-चाट, हमको वो दुलराती है
मैया जैसी गैया को भी, ला देंगे हम कनौसी
गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी…

बिल्ली मौसी में अदब बहुत है, कहती है-मैं आऊँ
उसके संग खेलन को मम्मी, क्यों नहीं मैं जाऊँ
उसको छोड़ बता दे मुझको, प्यारी है कौन-सी
गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी…

बाबा हमरे बात किये थे, फोन किये जब दिल्ली से
कहते रहते हैं वे सदा, सीखो तुम गैया-बिल्ली से
बिल्ली से सीखो सतर्कता, परहितार्थ करो गौ-सी
गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी…

– डॉ. गोपाल निर्दोष

 

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