साथी

साथी

By |2017-08-01T16:16:29+00:00July 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

साथी सफर में साथ रहो संग  मेरे

देखो कहा तक चले सफर संग तेरे

बेआबरू    से   हो   चले  है   हम   बिन  तेरे

कैसे करे ये बयां कोई आरजू नहीं सिवाय तेरे

वाकिफ  तो  है  इससे  कई  चेहरे  है  तेरे

मग़र क्या करे पसन्द हमें  है सारे  रंग तेरे

कलाम लिख राह हु सारे तेरे संग मेरे

संजीदा  क्यों हो  गए  हम  प्यारे  मेरे

तेरी  मोहब्बत  में एक  गुनाह  ये  कर  लिया  प्यारे

ख़ुदा को ख़ुदा न कहकर तुझे ख़ुदा कह दिया प्यारे

 

-कुलदीप सिंह

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