हैवान बन जाते हो किसी इंसान के आगे
कुछ और सोचो हिन्दू मुसलमान के आगे
हमे मत सिखाओ ये पाठ राष्ट्रभक्ति का
हमारी जान भी सस्ती हैं हिंदुस्तान के आगे
ये कुर्सियां तुम्हे खाने को रोटी नही देंगी
कल हाथ फैलाओगे तुम किसान के आगे
हाँ चोर है वो जालिम जरूर कत्ल कर देना
कल रोटियां चुराएगा किसी दुकान के आगे
अब कब्र में भी चैन से ये सोने नही देंगे
बस्तियां बना रहे हैं कब्रिस्तान के आगे
खूब आंधिया चलाओ बवंडर पैदा करो
एक दियां जला रखा हैं तूफान के आगे

– देवानन्द शर्मा

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5 Comments

  1. hindilekhak

    बहुत ही सुन्दर रचना …

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  2. अमित कुमार

    सुंदर रचना लाजबाब

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  3. Kiran

    So nice dev sharma ji

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  4. महिमा शर्मा

    बहुत उम्दा

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  5. अभिषेक गुप्ता

    आपकी लेखनी को सलाम

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