1. कभी मन्दिर को तोड़ देते हो,

कभी मस्जिद को तोड़ देते हो।

कभी फुरसत मिले तो उन दिवारो को भी तोड़ देना

जो एक दूसरे को अलग कर देते हो।।

 

2.धर्म की लड़ाई में , लड़ते मरते लोग।

मेरा धर्म वो है, जहाँ रहते एक साथ लोग।।

 

3.आओ मिले गले सब, हिन्दू-मुस्लिम-सिख।

दुनिया के बाजार में, नई करे यह रित।।

 

4.एक बार हिन्दूस्तान बटाँ, अब घर में बँटते लोग।

हमें जाना वहाँ पर, जहाँ रहते हैं साथ लोग।।

 

  1. पढ़े-लिखे है लोग पर, फिर भी इतने अंजान।

खून की होली देखकर, रोता हिन्दूस्तान।।

 

6  मन्दिर में सोना चढ़े, चादर चढ़े मजार।

बाहर गरीब को देखा नहीं, सब दान बेकार।।

– संतोष कुमार वर्मा 

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