नानी को भगवान कृष्ण के वागे (पोशाख )बनाने का शौक था ,यही उनकी कृष्ण के प्रति सेवा भक्ति भी थी | वे अपनी बुढ़ी आखों से हाथ सिलाई मशीन पर नित्य वागे सीकर छोटे गोपाल मंदिर मे जाती वहां भजन करती व हाथ ,मशीन से तैयार किये गये वस्त्रों को मंदिर आने वाली भक्तो मे निशुल्क बाँट देती | कई घरों मे भगवान के सुन्दर सजीले वागो को पाकर लोग उनकी प्रशंसा करने लगते  थे | वस्त्रों की भेट को नानी भगवान पर चढ़ाये जाने वाली फूलों की तरह मानती थी |इसी से नानी के मन को शांति  मिलती थी |कर्म,कला, श्रम,,भक्तिभाव से की जाने वाली पूजा  वाकई दूसरों को भी वागे की कला की प्रेरणा  देती थी |आज नानी इस दुनिया मे नहीं है किन्तु उनके सीले सुन्दर तरीके से वागे बनाने की कला एवं उन्हे निशुल्क बांटनेका पुनीत कार्य आज दूसरों को प्रेरणा   दे गया है |भक्ति भाव से पूजा करने का ये ढंग वाकई सुन्दर व प्रेरणा दायक भी है |बस इस कला का एक दुसरे को बाटने का ज्ञान होना चाहिये|वर्तमान में भगवान को ठंड में ऊनी वस्त्र तैयार कर उन्हें पहनाया जाता है ।  अपने आरध्य को ठंड से बचाकर उनका भी ख्याल रख जाने की परंपरा है क्योकि वे हर मौसम में हमारा भी तो ख्याल रखते है

संजय वर्मादृर्ष्टि

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *