दूर हो देश से, द्वेष परिवेश से

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दूर हो देश से, द्वेष परिवेश से

By |2017-06-22T23:06:31+00:00June 22nd, 2017|Categories: आलोचना|1 Comment

दूर हो देश से, द्वेष परिवेश से, है जरूरी बहुत ये वतन के लिए।
बीज नफरत का रोपें न, अब बस करें, है जरूरी बहुत ये चमन के लिए।

ये चमन है तुम्हारा हमारा चलो,
मिलके सीचें इसे शुद्धतम भाव से।
कोई छोटा न हो, हो न कोई बड़ा,
एक दूजे को जीतें नमन भाव से।।
ऊँच का नीच का भेद मिट जाये अब, है जरूरी बहुत ये अमन के लिए।….

देशहित हम करें काम निर्माण का,
चाहे संधान का चाहे खलिहान का।
सब सपन हम शहीदों के पूरे करें,
ऋण चुकाना हमें उनके बलिदान का।।
देशहित निज कर्म तुम करो, हम करें, है जरूरी बहुत ये सृजन के लिए।…

एकता देश की हम सुरक्षित रखें,
दूर रहकर सदा वाद-अपवाद से।
तोड़ डालें आतंक के विषदंश को,
दूर रखकर सभी को अतिवाद से।।
जब भी पकड़े, पकड़कर वहीं ठोंक दे, है जरूरी बहुत ये दमन के लिए।…

पता ग्राम ढबारसी
पोस्ट जिंदल नगर पिन कोड 201302
जिला गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल नो. 9311871139

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One Comment

  1. सोनवीर June 23, 2017 at 4:17 pm

    बहुत खूब भाई

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