1.स्पंदन…./2.दृग शर …

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1.स्पंदन…./2.दृग शर …

By |2018-09-01T10:50:16+00:00June 22nd, 2017|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|0 Comments

1.स्पंदन….

झुकी नज़र रक्ताभ अधर
…हुए अंतर्मन के भाव प्रखर
……घोर तिमिर में स्पर्श तुम्हारे
…………स्वप्न स्पंदन सब गए निखर

……………………………………..

2.दृग शर …

चक्षु, प्रीत मनुहार करते रहे l
…यथार्थ, स्वप्न संहार करते रहे l
……घाव, तृषित रहे स्पर्श के लिए ,
……….पर दृग , शर प्रहार करते रहे ll

सुशील सरना

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