अंगड़ाई …

शब् है शबाब है वो भी बे-हिज़ाब है
…….गेसुओं से झांकता जैसे माहताब है
………..सो रही है चाँदनी आरज़ू की झील पर
……………..अंगड़ाई उस शोख उस पे लाज़वाब है
सुशील सरना

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