अंगड़ाई …

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अंगड़ाई …

By |2018-09-01T10:50:17+00:00May 22nd, 2017|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|0 Comments

अंगड़ाई …

शब् है शबाब है वो भी बे-हिज़ाब है
…….गेसुओं से झांकता जैसे माहताब है
………..सो रही है चाँदनी आरज़ू की झील पर
……………..अंगड़ाई उस शोख उस पे लाज़वाब है
सुशील सरना

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