~~~मासूमियत ~~~
सर्द हो गये दिल के एहसास ।
मासूमियत कहाँ खो गई ।
सूख जो गये धमनियों में खून।
बचपने का दम निकल गया।

माँ की पल्लू में अब भी कहीं।
हैं पड़ी हुयी मासूम घड़ी।
जब वो कहे आ मेरे बच्चे ।
दे दूँ प्यार मैं ले लूँ दुख तेरे ।
सर्द……
बच्चे मुझे माँ जब कहें।
गोद में सर दें जन्नत लगे ।
कितने भी बडे़ वो हो गयें।
लागे मुझे मासूम से ।
सर्द…..
ओ मेरे साई दूँ मैं दुहायी दुहाई।
सर तेरी चरणों में चढ़ा दूं ।
हर जो तु ले सारे दर्द को ।
दुनिया मुझे मासूम लगे ।
सर्द…..
~~रश्मि किरण

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