हर शै …

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हर शै …

By |2018-09-01T10:50:16+00:00June 27th, 2017|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|0 Comments
हर शै …
 
तारीकी में भी इक तनवीर निहां होती हैl
ख़्वाब-ए-जागीर तसव्वुर में अयाँ होती है l
इक हसीं सी हकीकत है ये कायनात की ,
जवानी की चौखट पे हर शै जवां होती है ll
 
तारीकी =अँधेरा ,तनवीर=रोशनी की किरण
निहां=छुपी , अयाँ =प्रकट
 
सुशील सरना
 
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