हर शै …
 
तारीकी में भी इक तनवीर निहां होती हैl
ख़्वाब-ए-जागीर तसव्वुर में अयाँ होती है l
इक हसीं सी हकीकत है ये कायनात की ,
जवानी की चौखट पे हर शै जवां होती है ll
 
तारीकी =अँधेरा ,तनवीर=रोशनी की किरण
निहां=छुपी , अयाँ =प्रकट
 
सुशील सरना
 
No votes yet.
Please wait...