धरती

धरती हमारे ,
दिये जख्मो से,
तड़प रही है,
कराह रही है…..
पुकार रही है,
कोई तो सुनो,
धरती माँ की पुकार,
कोई तो आओ,
उसक द्धार……
उसके घावो,
को सहलाओ,
उसमे मरहम लगाओ…..
पेड़ लगाओ,
जिससे बढ़ जाये,
धरती की नमी,
ठंडी हवा बहती जाये…
जो प्रदूषण दूर भगाये,
पेड़ की जड़े,
जल को सोखकर,
धरती का ,
जल स्तर  बढ़ाये,
जल की समस्या ,
का हल मिल जाये,
और हमारा जीवन,
बच जाये………..

-गरिमा कांसकार्

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