रूठ के …

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रूठ के …

By |2018-09-01T10:50:15+00:00July 2nd, 2017|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|0 Comments

जीत छीन लो हार न छीनो।
जीने का अधिकार न छीनो।
अंगार मुझे दो चाहे जितने,
रूठ के मेरा प्यार न छीनो।।

– सुशील सरना

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