विज्ञान बनाम आध्यात्म

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विज्ञान बनाम आध्यात्म

आध्यात्म बनाम विज्ञान Part 1:- आध्यात्म का जन्म पूरब सभ्यता में हुआ और विज्ञान का पश्चिम शभ्यता में! देखा जाये तो मनुष्य को दोनों विधाओं की आवश्यकता रही है! परन्तु जैसे जैसे समय गुजरता गया आध्यात्म बनावटी , आडम्बरी एवं अंधविश्वाश में परिवर्तित होता चला गया व विज्ञान बलवती और विकसित होता चला गया! आज आध्यात्म के बिना हम रह सकते हैं परन्तु विज्ञान के बिना जीवन की गाड़ी नहीं चलायी जा सकती!
आध्यात्म ने हमें बहुत से मनगढ़ंत एवं विकृत साहित्य दिये हैं जिनकों पढ़कर मनुष्य अाडम्बर,अंधविश्वास , कुरीतियों एवं अशान्ति के अंधकाररूपी जाल में उलझता चला गया!विज्ञान ने मनुष्य को उन्नत तकनीकों का उपहार दिया, नित नये आविष्कार दिये!
आविष्कारों के माध्धयम से नयी-नयी तकनीकि विकसित करके भौतिक,रसायन ,
जीव-विज्ञान , चिकित्सा ,संचार,परिवहन, शिच्छा आदि के द्वारा मनुष्य के जीवन को अति सुगम एवं सरल बना दिया है!
आज कार, हवाइ जहाज, कमप्यूटर, इंटरनेट, टेलिविजन, मोबाइल, मेडिकल के बिना जीवन काफी कठिन ही नहीं लगभग असंभव ह!
वहीं आध्यात्म मिथ्या, आडम्बर, अंधविश्वास, क्रोध, मध, लोभ, मोह , विकृती एवं कुरीतियों के अथाह सागर में डुबकियां लगा रहा है!
एेसा नहीं है कि आध्यातम हमेशा एेसी विकृत अवस्था में रहा होगा!
पर जब से इसका वर्ग विशेष द्वारा निजीकरण होता आया है ये इस अवस्था में पहुँचता रहा है! उस वर्ग विशेष ने अपने मनगढ़ंत साहित्य रचे जिनमें सत्यता एवं प्रमाणिकता नहीं के बराबर है!
नि:संदेह कभी आध्यात्म के शुद्घ रूप से योग, साधना द्वारा शांत चित्त,शांत मन एवं ज्ञान की अनुभूति होती रही होगी!
परन्तु आज अधिकतर योगियों,साधकों एवं आध्यात्म के ठेकेद्वारों द्वारा पथभ्रमित किया जा रहा है! हम देशवासी रूढिवादी,परंपरावादी, अंधविश्वासी होकर तरक्की तो नहीं अपितु पिछड़ेपन में सदियों पीछे चले जा रहे हैं!

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