गुजरिया

मन का पंक्षी पल पल डोले

कौन दिशा में चली री गुजरिया

किस सोच में संतप्त अप्सरा

बटोही तेरा उस पार शची री

नाव भी है पतवार भी है

बैठो सुंदर नार

मन का पंक्षी पल पल डोले

कौन दिशा में चली री गुजरिया

देह तुम्हारी सोने जैसी

इठलाती और  बलखाती हो तुम

माथे पर का टीका झुमर है

तुम हो अद्वितीय नार

मन का पंक्षी पल पल डोले

कौन दिशा में चली री गुजरिया

महकती हो तुम रजनीगंधा सी

तेरी खुशबू चारों ओर है उड़ती

कमलनयनी नैन तुम्हारे

इन्द्प्रिया सी तुम लगती हो

मन का पंक्षी पल पल डोले

कौन दिशा में चली री गुजरिया

 

 

 

 

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu