मतवारी मै पीती जाऊं

तेरे नैना प्रिय चषक बने
मतवारी मै पीती जाऊं
घन बरसो तुम मै नीर बनूं
तुम तान बनो मैं बीन बनूं
स्वाती के बूंद बनो प्यारे
मै मोती बन सुषमा पाऊं
मतवारी मै पीती जाऊं

तुम राग बनो मैं गीत बनूं
फिर देह धाम से दूर चलूं
मै आत्म अंश बनकर तेरी
आत्मा मे ही जीवन पाऊं
मतवारी मै पीती जाऊं

स्वच्छन्द प्रेम की मदिरा हो
हम दोनो ही मतवारे हों
तुममें मै हूं मुझमें तुम हो
मै तुम का भेद मिटा डालूं
मतवारी मै पीती जाऊं

लेखक – रश्मि दुबे

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