अनमोल बेटी

जहां घरों और मंदिरों में देवियों के रूप
में मूर्तियों को पूजा जाता है

घर और मंदिरों में आदर और सम्मान के साथ
पत्थर की बेजान मूर्तियों को
स्थान(स्थापना) दिया जाता है

वहीँ समाज और घरों की देवियों नन्ही कलि को कोख में ही
विस्थापित कर दिया जाता है
वो देवी हमेशा आदर और सम्मान की प्यासी पाई जाती है

कभी समाज की गन्दी नझरों व सोच
तो कभी घरों में घरेलू हिंसा का शिकार
बनाई जाती है
वहीँ ये आत्महत्या के लिए उकसाई जाती है

कभी छेड़छाड़ तो कभी गन्दी बातें सुनाई जाती है
कभी घर की चार दीवारियों, तो कभी भरे समाज में
नन्ही सी कलि को भी हवश का शिकार बनाई जाती है

सारी गलतियों का जिम्मेदार उन्हें ही ठहेराया जाता है
तो कभी कही पर मौत के घाट उतार दिया जाता है

कभी हमारे कपडें, तो कभी देर रात घर से बाहार
आदि गलती निकाल कर हमें ही कोस
दिया जाता है

कभी दो साल तो कभी पांच साल की
बच्चियों की इज्जत के साथ खिलवाड़
किया जाता है

हमें सदा बंदिशों में रखा जाता है
मंदिरों और घरों में सदा मूर्तियों को ही
पूजा जाता है

भूपेंद्र रावत

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