गुड्डे गुड़िया का खेल

बचपन के प्यार को गुड्डे गुड़िया का खेल कह कर
जिंदगी के दाव खेलने, जवानी के पंख लगा कर

वो हमारी जिंदगी से रूकसत हो गए
अंजान दुनिया में उड़ गए

ह़म जख्मो को सहलाते व गिनते रहे
और बचपन की यादो में खो गए

वो जिंदगी की उड़ान उड़ते-उड़ते एक दिन थक कर
हमारे दिल के दरवाजे पर ही दस्तक देंगे

ह़म फिर से नई दुनिया बसाएंगे
एक दुसरे में खो जाएंगे
लेखक –  संजीव कुमार बर्मन

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu